Raj Kapoor

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ख़्वाजा अहमद अब्बास: जिन्होंने समाजवाद को सिनेमा के पर्दे पर पहुंचाया

देश में समानांतर या नव-यथार्थवादी सिनेमा की जब भी बात होगी, ख्वाजा अहमद अब्बास का नाम फ़िल्मों की इस मुख़्तलिफ़ धारा के रहनुमाओं में गिना जाएगा। उन्होंने अपने लेखन से पूरी दुनिया को मुहब्बत, अमन और इंसानियत का पैग़ाम दिया। अब्बास ने न सिर्फ़ फ़िल्मों, बल्कि पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में भी नए मुक़ाम क़ायम किए।

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सिनेमा में ‘आवारा’ और उसकी दुनिया का विमर्श

फ़िल्म ‘आवारा ‘ के जज ‘रघुनाथ’ समाज से विद्रोह करके एक ‘विधवा’ से शादी करते हैं मगर पत्नी के एक डाकू द्वारा अपहरण कर लेने के बाद वापिस आने पर उसे घर मे नहीं रख पाते। ‘लोकोपवाद’ का भय उन पर इस कदर हावी है उनकी प्रारम्भिक ‘प्रगतिशीलता’ हवा हो जाती है और अपनी गर्भवती पत्नी को घर से निकाल देते हैं।

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