अल गूना 1: अरब सिनेमा की पहचान गढ़ता एक फिल्म फेस्टिवल

अरब सिनेमा और अरब समाज की नई पहचान गढ़ता एक अनोखा फिल्म फेस्टिवल...

House of Secrets: The Burari Deaths : A Review

Three years back in 2018 the deaths of eleven family members in Burari, Delhi; had shaken the whole nation. Now Leena Yadav...

‘माफ़ी’ और ‘वीर’ पर बहस के बीच एक क्रांतिकारी की कहानी

शूजीत सरकार और विकी कौशल की मेहनत की बदौलत यह फिल्म बायो-पिक कैटेगरी में ख़ास दर्जा हासिल करने की काबिलियत रखती है।...

Chehre: Missing The Honest Face Of A Film

A problem with Chehre is that it is based around what is regularly referred to by the characters as a “game”. The stakes are not high enough, the...

तपन सिन्हा का सिनेमा

Birth anniversary special: बंगाली सिनेमा पर जब भी कोई गंभीर चर्चा होती है वो बांग्ला फिल्मकारों की सबसे प्रतिष्ठित त्रयी- सत्यजित राय, ऋत्विक घटक और...

जर्मन सिनेमा और फ़तिह अकीन

जर्मन फिल्मकार फ़तिह अकीन पिछले डेढ़ दशक के दौरान यूरोप के सबसे चर्चित फिल्म निर्देशकों में गिेन जाते रहे हैं। उनकी स्टाइल का असर भारत के नई पीढ़ी के...

द फादर: उम्र, अकेलेपन और विस्मृति से जूझते पिता की कहानी

द फ़ादर डिमेंशिया के मरीज़ एंथनी और उनकी बेटी एन के रिश्ते की कहानी है जो विदेशी पृष्ठभूमि की होते हुए भी अपनी सी लगेगी...

सिनेमा के साहित्य की समीक्षा: फिल्म सारांश

"हम सब का अंत है मगर जीवन का अंत नही है"। जीवन चला चलता है। महेश भट्ट की 1984 में बनाई फिल्म सारांश की साहित्यिक समीक्षा।...

राष्ट्रवादी फैशन का ढीला-ढाला ‘बेलबॉटम’

बेलबाॅटम एक विमान अपहरण कांड में पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई को धूल चटाकर न सिर्फ सभी यात्रियों को सकुशल दुबई से भारत ले आता है बल्कि पाकिस्तानी विमान...

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