Dostojee

‘दोस्तजी’: ‘पथेर पांचाली’ की याद दिलाती एक अनूठी बांग्ला फिल्म

प्रसून चटर्जी द्वारा लिखित और निर्देशित बांग्ला फिल्म ‘दोस्तजी’ हाल ही में रिलीज़ हुई है और खूब तारीफ बटोर रही है। बाबरी मस्जिद विध्वंस की पृष्ठभूमि में बनीं ये बांग्ला फिल्म बड़ों की कथा...

याद-ए-साहिर बरास्ते ‘ख़ूबसूरत मोड़’: ‘चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों’

वह कहानी जिसको पूर्णता प्रदान करना सम्भव न हो उसे ‘एक ख़ूबसूरत मोड़’ देना बेहतर होता है। ज़ाहिर है जिस रिश्ते को किसी ‘नाम’ के अंजाम तक न पहुँचाया जा सके समाज मे उसकी कोई ‘मान्यता’ नहीं होती, इसलिये उस ‘रिश्ते’ को तोड़ देना ही अच्छा होता है।

‘गमन’ : इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यों है?

शहर उतना दे नहीं पा रहा जितनी उम्मीद थी। यहाँ बेहतर भविष्य केवल सपना है। हक़ीकत चंद लोगों के लिए है। वह टैक्सी में इन ‘चंद लोगों’ की दुनिया देखता है,उनकी अट्टालिकाएं देखता है, और दूसरी तरफ सड़कों में बसर कर रहे लोगों को देखता है, मगर दिल है कि मानता नहीं! लगता है कुछ हो जाएगा।

सुसमन: आत्मा की चादर बीनने की दारुण दुख गाथा

फ़िल्म में ‘रामुलु’ एक कुशल बुनकर है पर उस का हुनर केवल प्रतिष्ठा की बात रह गयी है, वह रोटी नहीं दे पाती। वह कपड़े बुनता है मगर अपनी बेटी के लिए साड़ी बुन सके उसके लिए धागे नहीं है।

आज़ादी की परछाई में कैद ‘भूमिका’

फ़िल्म ‘भूमिका’ आजादी के पूर्व और बाद के दो दशकों में एक स्त्री के व्यावसायिक सफलता मगर मानवीय चाह की असफलता के द्वंद्व को रेखांकित करती है।

वोदका लेमन: बिना विकल्पों वाले जीवन के सफ़र का संगीत

विश्व के सिनेमाई सौंदर्य के गुह्य रस्म-रिवाज़ सीरीज़ की चौथी और अंतिम कड़ी के तौर पर प्रस्तुत है आर्मीनियाई फिल्मकार हिनर सलीम  की फिल्म वोदका लेमन  की समीक्षा। इस सीरीज़ के लिए सुख्यात युवा साहित्यकार पूनम अरोड़ा  ने...

लोग फिल्में बनाते हैं, गोदार ने सिनेमा बनाया

गोदार ने सिनेमा के भविष्य के बारे में कहा कि ‘दस साल बाद सारे थियेटर मेरी फिल्में दिखाएँगे और गंभीर सिनेमा का लोकप्रिय दौर लौटेगा।

The Bow: मुक्त होने और मुक्त करने का सम्मोहन

‘विश्व के सिनेमाई सौंदर्य के गुह्य रस्म-रिवाज’ सीरीज़ के तीसरे भाग के तौर पर प्रख्यात दक्षिण कोरियाई फिल्म निर्देशक किम की-डुक की फिल्म ‘द बो’ की समीक्षा

Adieu Godard

अलविदा गोदार: सिनेमा में नियम तोड़ने के नियम सिखाने का शुक्रिया

50 और 60 के दशक में फ्रेंच न्यू वेव सिनेमा के अग्रणी फिल्मकारों में रहे ज्यां-लुक गोदार का 91 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया। लुई माल, क्लूद शैबरॉल, फ्रांस्वा ट्रूफॉ, एलेन रेने...