When a Film Sparks Dialogue: The March Chapter of Talk Cinema On The Floor

Talk Cinema on the Floor is not just about screening films or hosting discussions. It is about creating a space where cinema becomes a reason for...

सिनेमा, ‘साइंटिस्ट’और संवाद: दिल्ली में ‘टॉक सिनेमा- मार्च चैप्टर’

'टॉक सिनेमा ऑन द फ्लोर' सिर्फ़ फ़िल्में दिखाने या उन पर चर्चा करने तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसा स्पेस बनाने के बारे में है जहां सिनेमा लोगों को साथ...

याद ए बलराज साहनी वाया गर्म हवा

गर्म हवा की कहानी घूमती है सलीम मिर्जा' (बलराज साहनी), जो कि आगरा में एक जूते के कारखाने के मालिक हैं, उनके इर्द गिर्द। बँटवारा हो चुका है, सलीम...

फिल्म फेस्टिवल का काला सच, ‘एंट्री फीस स्कैम और सरकारी इरादे (1)

देशभर में बड़ी संख्या में ऐसे तथाकथित फिल्म फेस्टिवल सामने आ रहे हैं, जिनका मकसद सिनेमा, संवाद, बाज़ार या प्रतिभा को मंच देना नहीं, बल्कि नये...

न्यू थिएटर्स: जिसने भारतीय सिनेमा में की प्लेबैक सिंगिंग की शुरुआत

न्यू थिएटर्स का दौर भारतीय सिनेमा की यात्रा में हमेशा एक मील का पत्थर रहेगा। न्यू थिएटर्स के योगदान को जिन अहम पहलुओं के ज़रिए समझा जा सकता है, उनमें...

Talk Cinema On The Floor – February Chapter: Cinema, Audience & Business in Focus

Cinema is not merely entertainment; it is a convergence of art, business, and audience experience. The February chapter of NDFF’s “Talk Cinema On The...

TCOTF फरवरी चैप्टर: ‘मिनिप्लेक्स का दौर आने वाला है…’

सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि कला, व्यवसाय और दर्शक संवेदना का संगम है। NDFF के ‘Talk Cinema On The Floor’ के फरवरी अध्याय में इसी व्यापक दृष्टि पर...

‘छोटी सी बात’ के 50 बरस: बासु चटर्जी की याद

बासु चटर्जी और हृषिकेश मुखर्जी दो ऐसे नाम हैं, जिन्होने हिंदी सिनेमा में पारिवारिक सिनेमा के लिए एक बिलकुल नई...

बेला टार, लाज़लो क्रासनाहोरकाई और ‘सेटनटैंगो’

अभी हाल में मैंने ‘द टुरिन होर्स’ देखी। इसकी अन्य सिनेमैटिक विशेषताओं के अलावा इसे देखते हुए मुझे प्रेमचंद के ‘कफ़न’, ‘वेटिंग फ़ॉर गोदो’ की झलक मिली।...

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