Satyajit Ray

सत्यजित रे… जिसने बदल दिया भारतीय सिनेमा

दूरबीन का क्या काम होता है? दूर के दृश्य को आपके पास ले आना , इतना पास कि लगे जैसे आँख से जुड़ा रखा हो। सत्यजित रे का सिनेमा समय और समाज की हकीकत...

पंचलाइट की रोशनी में ‘पंचायत’

पारुल बुधकर/ आशीष कुमार सिंह TVF आमतौर पर अपने कंटेंट में किसी सामाजिक मुद्दे पर तीखा व्यंग्य करता है, ‘पंचायत’ में ये अलग अंदाज़ में, अलग विषयवस्तु के साथ है। राजनीति में महिलाओं की...

Indian Web Series

‘सीज़न गेम’ में चूक रहे भारतीय वेब सीरीज़

– Parul Budhkar (पारुल बुधकर एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। पिछले दो दशकों के दौरान उन्होने कई जाने माने अखबारों और न्यूज़ चैनलों के लिए काम किया है। उन्होने इस दौरान राजनीति समेत कला-संस्कृति के...

ऑस्कर, रोमा और मेक्सिको

आशीष कुमार सिंह     91वें ऑस्कर के लिए 10 नामांकन पाने वाली मेक्सिकन फिल्म ‘रोमा’ ने तीन ऑस्कर जीतकर कई लिहाज़ से इतिहास रच दिया है। हॉलीवुड के सबसे प्रतिभाशाली निर्देशकों में गिने...

Remembering Mrinal Sen

  New Delhi Film Foundation is organizing screening of the first hindi film of Mrinal Sen, Bhuvan Shome. This 1969 film was the film that shaped the cinema of 1970’s and made a way...

New Film Pengalila: केरल के इस अद्भुत कालचित्रण में हर समाज का अक्स है…

  भारत में क्षेत्रीय सिनेमा में लगातार बेहतरीन काम हो रहा है, जो मुख्यधारा के दर्शकों और सिनेप्रेमियों की जानकारी और पहुंच से पूरी तरह दूर है। NDFF इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहा...