विश्व के सिनेमाई सौंदर्य के गुह्य रस्म-रिवाज-1: ‘इन द रियल्म ऑफ़ द सेन्सेस’ 

‘इन द रियल्म ऑफ़ द सेन्सेस’ नागिसा ओसीमा के निर्देशन में बनी 1976 में प्रदर्शित हुई एक विवादास्पद जापानी फिल्म है. फिल्म एक सत्य घटना पर आधारित है जिसने उस समय पूरे जापान में हड़कंप मचा दिया था. 

इरफ़ान: जो गायब भी हैं, हाज़िर भी…

कुछ एक्टर किसी भी सीन को सिर्फ अपनी उपस्थिति से बाईस प्रतिशत बेहतर कर देते हैं डायलॉग बोले बिना ही। इरफान उन एक्टर्स में से थे… दो साल गए उन्हे गए।

फिनलैंड का सिनेमा: ‘जो प्रेम में डूबा है, उसकी कुछ तो इज़्ज़त करो…’

दुनिया का सबसे खुशहाल देश कहे जाने वाले यूरोपीय देश फ़िनलैंड में सिनेमा का भी शानदार इतिहास रहा है। विश्व सिनेमा में फिनलैंड के दो फिल्मकारों की बीते कुछ समय में खूब चर्चा होती रही है। जुहो कुओसमानेन की नई फिल्म ‘कंपार्टमेंट नंबर 6 ‘ और टीमु निक्की की फिल्म ‘द ब्लाइंड मैन हू डिड नॉट वांट टु सी टाइटेनिक’ की खास समीक्षा।

Remembering Satyajit Ray – The Master He was

New Delhi Film Foundation in association with ‘Hindi Se Pyar Hai’ Group and Consulate General of India, New Yorkto Invite you for a stimulating and entertaining talk onRemembering Satyajit Ray – The Master He...

ए थर्सडे: ज़ख्मी औरत का ‘ए वेडनस्डे’ अवतार

यामी गौतम की नई फिल्म ‘ए थर्सडे’ 2008 की फिल्म ‘ए वेडनस्डे’ वाले रास्ते पर चलते हुए भी बचकाने ट्रीटमेंट की वजह से उस जैसा प्रभाव नहीं छोड़ पाती।

रूसी सिनेमा का नया अवतार

विश्व सिनेमा में रूस के योगदान पर जब भी बात होती है तो हम आम तौर पर सर्जेई आइजेंस्टाइन और आंद्रे तारकोवस्की का नाम लेते हैं और हमारी सूची वहीं पर समाप्त हो जाती है पर हाल के सालों में स्थिति काफी बदली है।

रिश्तों की ‘गहराइयां’ दिखाती एक उथली फिल्म

गहराइयाँ अपने शीर्षक से उलट उथली फिल्म है जिसे सिर्फ और सिर्फ दीपिका पादुकोण के अच्छे अभिनय ने कुछ बचा लिया है।

15 साल की लता मंगेशकर के जीवन का एक दिन… मोती बीए की कलम से

लता ने अपने साथ-साथ आशा भोसले और उषा मंगेशकर को भी अमर कर दिया। अमरत्व का यह स्थान प्राप्त करने में लता को कितनी ठोकरें खानी पड़ीं और कितना संघर्ष करना पड़ा।

रंग दे बसंती: ‘डीजे’ से ‘लक्ष्मण’ तक के जागने की कहानी

26 जनवरी के दिन देशभक्ति के माहौल में राकेश ओमप्रकाश मेहरा की रंग दे बसंती की बात ज़रुर की जानी चाहिए… जो इसी दिन साल 2006 में रिलीज़ हुई थी। मुख्यधारा की ये फिल्म...

गाइड: क्या से क्या हो गया…

विजय आनंद एक ऐसे लेखक-निर्देशक रहे हैं, जिन्होने गाइड जैसी क्लासिक फिल्म भी बनाई और ज्वेल थीफ, जॉनी मेरा नाम जैसी कल्ट फिल्में भी। 22 जनवरी को उनके जन्मदिन के मौके पर उनकी ऑलटाइम...