विश्व के सिनेमाई सौंदर्य के गुह्य रस्म-रिवाज़-2: ‘रेज़ द रेड लैंटर्न’

चीनी फिल्मकार  ‘झांग इमोउ’ (Zhang Yimou)  के निर्देशन में सन् 1991 में बनी फिल्म ‘Raise The Red Lantern’ एक ऐसे चीनी समाज का प्रतिनिधित्व करती है जिसमें पारिवारिक परंपराओं की घृणात्मक भावशून्यता को चार स्त्रियां अपनी-अपनी संभावनाओं में परस्पर विरोधी होकर ढोती हैं.

सत्यजित राय और उनका सिनेमा क्यों खास हैं?

संस्कृति, सिनेमा और मीडिया के गंभीर समीक्षक जवरीमल्ल पारख जी का ये लेख सत्यजित राय पर लिखी उनकी श्रृंखला की पहली कड़ी है। जो लोग सत्यजित राय के काम और उसकी अहमियत के बारे में विस्तार से नहीं जानते हैं, उन्हे ये लेख ज़रुर पढ़ना चाहिए।

पंचायत सीज़न 2: ‘फुलेरा’ में दिल लगने की दिलचस्प दास्तान

जब आप कहानी के पात्रों के अभिनय को अभिनय समझना बंद कर दें, काल्पनिक गांव की गलियों से वाकिफ़ हो जाएं, जब पात्रों द्वारा कहे गए संवाद आपके हृदय में भी वही समान भाव उत्पन्न कर दें, तब समझ लीजिए कि निर्देशक ने अपना काम पूरी निष्ठा और कुशलता से किया है।

विश्व के सिनेमाई सौंदर्य के गुह्य रस्म-रिवाज-1: ‘इन द रियल्म ऑफ़ द सेन्सेस’ 

‘इन द रियल्म ऑफ़ द सेन्सेस’ नागिसा ओसीमा के निर्देशन में बनी 1976 में प्रदर्शित हुई एक विवादास्पद जापानी फिल्म है. फिल्म एक सत्य घटना पर आधारित है जिसने उस समय पूरे जापान में हड़कंप मचा दिया था. 

इरफ़ान: जो गायब भी हैं, हाज़िर भी…

कुछ एक्टर किसी भी सीन को सिर्फ अपनी उपस्थिति से बाईस प्रतिशत बेहतर कर देते हैं डायलॉग बोले बिना ही। इरफान उन एक्टर्स में से थे… दो साल गए उन्हे गए।

फिनलैंड का सिनेमा: ‘जो प्रेम में डूबा है, उसकी कुछ तो इज़्ज़त करो…’

दुनिया का सबसे खुशहाल देश कहे जाने वाले यूरोपीय देश फ़िनलैंड में सिनेमा का भी शानदार इतिहास रहा है। विश्व सिनेमा में फिनलैंड के दो फिल्मकारों की बीते कुछ समय में खूब चर्चा होती रही है। जुहो कुओसमानेन की नई फिल्म ‘कंपार्टमेंट नंबर 6 ‘ और टीमु निक्की की फिल्म ‘द ब्लाइंड मैन हू डिड नॉट वांट टु सी टाइटेनिक’ की खास समीक्षा।

Remembering Satyajit Ray – The Master He was

New Delhi Film Foundation in association with ‘Hindi Se Pyar Hai’ Group and Consulate General of India, New Yorkto Invite you for a stimulating and entertaining talk onRemembering Satyajit Ray – The Master He...