Remembering Chetan Anand 0

‘हक़ीक़त’ जैसे माहौल में चेतन आनंद की याद…

चेतन आनंद एक बेहतरीन फ़िल्मकार होने के साथ साथ बेहद ज़हीन और नफ़ीस इनसान थे। 1946 में उनकी बनाई पहली ही फ़िल्म ‘नीचा नगर’ को फ्रांस के पहले कान फ़िल्म फेस्टिवल में ‘पाम डी ओर’ सम्मान से नवाज़ा गया था।

Amtaabh Srivastava 0

मालिक: समाज-सियासत का अक्स दिखाती फ़हद फ़ासिल की ‘आंखें’

आंखों से बेहतरीन अभिनय कैसे किया जाता है, फहाद लगातार उस कला में ख़ुद को फ़िल्म दर फ़िल्म मांजते हुए ‘मलिक’ में महारथी की तरह उभरे हैं। इरफान की अनुपस्थिति से ख़ाली हुई जगह को भरने की क्षमता है उनमें।

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नाम में क्या रखा है : दिलीप कुमार के बहाने

हिंदुस्तानी सिनेमा की जो धर्मनिरपेक्षता और साझा संस्कृति की परंपरा रही है, दिलीप कुमार उसी परंपरा के महान आइकन हैं क्योंकि वे जितने दिलीप कुमार हैं, उतने ही यूसुफ खान भी हैं। वे जितने देवदास हैं, उतने ही शहज़ादा सलीम भी हैं, जितने मुंबई के हैं, उतने ही पेशावर के भी हैं और जितने उर्दू के हैं, उतने ही हिंदी के हैं

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दिलीप कुमार : प्रेम और पीड़ा का मोहक मायालोक रचने वाला अप्रतिम कलाकार

नब्ज़ जांच लेना साहेब की दफ़नाने से पहले       कलाकार उम्दा है, कहीं किरदार में न हो….. कहने में रटी-रटाई सी बात लगती है लेकिन दिलीप कुमार का जाना सचमुच एक युग का अंत है।...

Amitaabh Srivastava 0

रे: सत्यजित रे की अद्भुत कहानियों से पहचान कराती सीरीज़

सत्यजित रे के जन्म शताब्दी वर्ष में नेटफ्लिक्स पर उनकी 4 कहानियों पर बनाई 4 फिल्मों की एक एंथोलॉजी रिलीज़ हुई है। इन्हे आज के दौर के 4 गंभीर डायरेक्टर्स ने निर्देशित किया है।...

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ग्रहण: ‘चौरासी’ के ज़रिए नफरत की राजनीति पर टिप्पणी

डिज़्नी-हॉटस्टार पर रिलीज़ नई वेब सीरीज़ ग्रहण इसलिए चर्चित हो रही है क्योंकि ये नई हिंदी के युवा उपन्यासकार सत्या व्यास के चर्चित उपन्यास चौरासी पर आधारित है। कितना दम है इस सीरीज़ में...

Rachit Raj 0

Sherni: A Film Protecting A Bleak Hope Amid Chaotic Madness

Newton director Amit Masurkar‘s new film Sherni has released on Amazon Prime and is winning wide critical acclaim. Here Rachit Raj gives a review of the film. Rachit prefers to be called a film critic by accident, an academician by...