February 11, 2023

News/ Updates

भारतीय फिल्मों में त्रयी परंपरा और बुद्धदेब बाबू

कवि, प्रोफेसर और फिल्मकार, बुद्धदेव दासगुप्ता समकालीन भारत की सबसे अहम सिनेमाई आवाजों में से थे। उनके पास कल्पना थी, एक कवि की गीतात्मकता थी और इसे सिनेमा में बदलने का हुनर था।

News/ Updates

पठान: राष्ट्रवाद के टेंपलेट वाला एक ‘छद्म सिनेमा’

सिनेमा अगर केवल तकनीकी फार्मूलों वाली वीडियो गेमिंग व डिब्बाबंद फूड का रूप ग्रहण कर ले, मनोरंजन को तकनीक की ‘अनरियल’ धमाचौकड़ी में बदल डाले तो समाज को उसका उपभोक्ता बनने से पहले सोचना चाहिए, न कि आठ सौ करोड़ का बिजनेस थमा देना चाहिए।

Scroll to Top