Category: News/ Updates

लोग फिल्में बनाते हैं, गोदार ने सिनेमा बनाया

गोदार ने सिनेमा के भविष्य के बारे में कहा कि ‘दस साल बाद सारे थियेटर मेरी फिल्में दिखाएँगे और गंभीर सिनेमा का लोकप्रिय दौर लौटेगा।

The Bow: मुक्त होने और मुक्त करने का सम्मोहन

‘विश्व के सिनेमाई सौंदर्य के गुह्य रस्म-रिवाज’ सीरीज़ के तीसरे भाग के तौर पर प्रख्यात दक्षिण कोरियाई फिल्म निर्देशक किम की-डुक की फिल्म ‘द बो’ की समीक्षा

Adieu Godard

अलविदा गोदार: सिनेमा में नियम तोड़ने के नियम सिखाने का शुक्रिया

50 और 60 के दशक में फ्रेंच न्यू वेव सिनेमा के अग्रणी फिल्मकारों में रहे ज्यां-लुक गोदार का 91 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया। लुई माल, क्लूद शैबरॉल, फ्रांस्वा ट्रूफॉ, एलेन रेने...

विश्व के सिनेमाई सौंदर्य के गुह्य रस्म-रिवाज़-2: ‘रेज़ द रेड लैंटर्न’

चीनी फिल्मकार  ‘झांग इमोउ’ (Zhang Yimou)  के निर्देशन में सन् 1991 में बनी फिल्म ‘Raise The Red Lantern’ एक ऐसे चीनी समाज का प्रतिनिधित्व करती है जिसमें पारिवारिक परंपराओं की घृणात्मक भावशून्यता को चार स्त्रियां अपनी-अपनी संभावनाओं में परस्पर विरोधी होकर ढोती हैं.

सत्यजित राय और उनका सिनेमा क्यों खास हैं?

संस्कृति, सिनेमा और मीडिया के गंभीर समीक्षक जवरीमल्ल पारख जी का ये लेख सत्यजित राय पर लिखी उनकी श्रृंखला की पहली कड़ी है। जो लोग सत्यजित राय के काम और उसकी अहमियत के बारे में विस्तार से नहीं जानते हैं, उन्हे ये लेख ज़रुर पढ़ना चाहिए।

पंचायत सीज़न 2: ‘फुलेरा’ में दिल लगने की दिलचस्प दास्तान

जब आप कहानी के पात्रों के अभिनय को अभिनय समझना बंद कर दें, काल्पनिक गांव की गलियों से वाकिफ़ हो जाएं, जब पात्रों द्वारा कहे गए संवाद आपके हृदय में भी वही समान भाव उत्पन्न कर दें, तब समझ लीजिए कि निर्देशक ने अपना काम पूरी निष्ठा और कुशलता से किया है।

विश्व के सिनेमाई सौंदर्य के गुह्य रस्म-रिवाज-1: ‘इन द रियल्म ऑफ़ द सेन्सेस’ 

‘इन द रियल्म ऑफ़ द सेन्सेस’ नागिसा ओसीमा के निर्देशन में बनी 1976 में प्रदर्शित हुई एक विवादास्पद जापानी फिल्म है. फिल्म एक सत्य घटना पर आधारित है जिसने उस समय पूरे जापान में हड़कंप मचा दिया था.