News/ Updates

काबुल का आरियाना: जो एक सिनेमाघर हुआ करता था…

फिल्मकार फेडरिको फेलिनी ने कभी कहा था कि “सिनेमा एक जादुई दर्पण है।” आरियाना वह दर्पण था जिसमें काबुल ने खुद को मुस्कुराते हुए देखा था। आज वह दर्पण टूट चुका है। काबुल की हवाओं में अब उस मलबे की धूल है, जिसमें दशकों का संगीत, तालियाँ और हज़ारों कहानियाँ दफ़्न हो चुकी हैं।