April 29, 2026

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इरफ़ान की यादें: वाया अनूप सिंह की ‘जहाँ ले चले हवा’

किताब में एक जगह इरफ़ान के हवाले से दर्ज है, ”मौत के बहुत सारे चेहरे हैं, अनूप साब। वे मेरा मन बहलाते रहते हैं, और मैं बेहतर ढंग से सांस लेने लगता हूं और दर्द तक को भूल जाता हूॅं। मौत के अनेक चेहरे। बहुत सारे। कभी—कभी वह एक रौशनी होती है, थोड़ी—सी पीली और नीली। कभी—कभी कोहरा। बहुत—से सपने। बहुत—से सपने।’

NDFF Satyajit Ray Memorial Talk
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सत्यजित राय मेमोरियल टॉक: आज के सिनेमा में यथार्थ और संवेदना की पुनर्स्मृति

‘सत्यजित राय मेमोरियल टॉक’ केवल एक स्मृति आयोजन नहीं, बल्कि सिनेमा की उस विरासत को जीवित रखने का प्रयास है, जो हमें बेहतर देखने, समझने और महसूस करने की क्षमता देती है। NDFF का यह प्रयास सिनेमा को उसकी जड़ों से जोड़ने और नई पीढ़ी तक उसकी संवेदना पहुँचाने की एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।

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