इरफ़ान की यादें: वाया अनूप सिंह की ‘जहाँ ले चले हवा’
किताब में एक जगह इरफ़ान के हवाले से दर्ज है, ”मौत के बहुत सारे चेहरे हैं, अनूप साब। वे मेरा मन बहलाते रहते हैं, और मैं बेहतर ढंग से सांस लेने लगता हूं और दर्द तक को भूल जाता हूॅं। मौत के अनेक चेहरे। बहुत सारे। कभी—कभी वह एक रौशनी होती है, थोड़ी—सी पीली और नीली। कभी—कभी कोहरा। बहुत—से सपने। बहुत—से सपने।’


