



पर्दे पर प्राण की असरदार मौजूदगी की वजह से ही फिल्मों के पोस्टर पर हीरो, हीरोइन के साथ उनके नाम का अलग से ज़िक्र ज़रुर होता था जो हिंदी में '...और...
कवि, प्रोफेसर और फिल्मकार, बुद्धदेव दासगुप्ता समकालीन भारत की सबसे अहम सिनेमाई आवाजों में से थे। उनके पास कल्पना थी, एक कवि की गीतात्मकता थी और इसे...
सिनेमा अगर केवल तकनीकी फार्मूलों वाली वीडियो गेमिंग व डिब्बाबंद फूड का रूप ग्रहण कर ले, मनोरंजन को तकनीक की 'अनरियल' धमाचौकड़ी में बदल डाले तो समाज को...
दक्षिण भारत के सुरीले संगीत की मिठास को अपनी आवाज़ के ज़रिए हिंदी सिनेमा संगीत में पहुंचाने वाली संभवत: पहली गायिका थीं वाणी जयराम।...
दरअसल, डबिंग और सबटाइटिल्स की सुविधा के साथ अब हिंदी का दर्शक न सिर्फ भारत की सभी भाषाओं के मनोरंजन का आनंद ले सकता है, बल्कि तमाम विदेशी कहानियाँ भी...
'आनंद' फ़िल्म का नायक आनंद(राजेश खन्ना) 'भरपूर जीवन जीने' का उदाहरण है। वह गंभीर बीमारी(कैंसर) से ग्रसित है और उसे मालूम है कि तीन माह से अधिक उसकी...
जैसा फ़िल्म में एक जगह कहा गया है हम बुख़ार को देखते हैं जो कि एक लक्षण है, बुखार के कारणों को नहीं देख पाते।...
फ़िल्म 'आवारा ' के जज 'रघुनाथ' समाज से विद्रोह करके एक 'विधवा' से शादी करते हैं मगर पत्नी के एक डाकू द्वारा अपहरण कर लेने के बाद वापिस आने पर उसे घर...
फ़िल्म 'सुबह' की 'सावित्री' का द्वंद्व इसी अस्मिता और पारिवारिकता के बीच सामंजस्य का है। वह जितना अपनी अस्मिता के प्रति सचेत है उतना ही अपने परिवार से...
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