बासु चटर्जी की ‘रजनीगंधा’: यही सच है

10 जनवरी बासु चटर्जी का जन्मदिन होता है। हिंदी सिनेमा में मध्यवर्ग के जीवन, उसके सपनों, आकांक्षाओं और कशमकश को...

अल गूना 3: अरब डाक्यूमेंट्री फिल्मों की साहसिक दुनिया

कुर्दिश मूल के स्वीडिश फिल्मकार होगिर हिरोरी की डाक्यूमेंट्री सबाया की आज दुनिया भर में बड़ी चर्चा हो रही है। होगिर हिरोरी अपनी जान जोखिम में...

गोविंद निहलानी के बहाने ‘अर्धसत्य’ की बात

कहीं हम सब जिसे सत्य मानते रहे हैं, सत्याभाष अथवा अर्धसत्य तो नही? किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले एक बार जरूर सोच लेना चाहिए, क्योंकि इधर असत्य का...

तीसरी कसम : न कोई इस पार हमारा, न कोई उस पार

फिल्म एक ऐसी विधा है, ऐसा आर्टफॉर्म है जिसमें कहानी किसी फिल्म का सबसे अधिक और सबसे कम महत्वपूर्ण तत्व...

दिलीप कुमार: सालगिरह पर साहिब-ए-आलम की याद

आज दिलीप कुमार ज़िंदा होते तो 99 साल के होते. 11 दिसंबर 1922 को पेशावर में वो पैदा हुए थे...

अल गूना 2: मोहम्मद दिआब, अमीरा और अरब सिनेमा

मिस्र के ही उमर अल जोहरी की फिल्म फेदर्स को लेकर देश भर में हंगामा हो रहा है। सोशल मीडिया पर राष्ट्रवादी समूह जमकर इसकी आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना...

Sooryavanshi: A Film With A Pre Covid Era ‘Entertainment Quotient’

Rohit Shetty-directed movie from his “cop cinematic universe” is everything that one expects from a commercial film these days – terrible filmmaking...

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