‘काबुलीवाला’ के वतन का सिनेमा

विश्व सिनेमा में अफगानिस्तान की फिल्मों की चर्चा तब शुरू हुई जब मशहूर फिल्मकार मोहसिन मखमलबाफ की फिल्म ' कंधार' (2001) दुनिया भर के करीब बीस से अधिक...

200 हल्ला हो: दलित स्त्रियों के आक्रोश की आवाज़

फ़िल्मों से दूर हो चुके अभिनेता-निर्देशक अमोल पालेकर ने लंबे समय बाद इस फ़िल्म से अभिनय में वापसी की है। अमोल पालेकर तजुर्बेकार अभिनेता हैं और मसाला...

There Are More Things Common Between Dilip Kumar And Naseeruddin Shah Than Their Differences

What they were both after was verisimilitude, of playing it and showing it like it is in real life, or would be in reality...

“I HAVE COLLECTED AROUND 20,000 POSTERS SPANNING 100 YEARS OF INDIAN CINEMA” – SMM AUSAJA

Meet SMM Ausaja. He is a crazy man He has not saved anything from his earnings because he has always concentrated on adding to his collection of film...

मिमी: सपनों के सौदे की कहानी, सरोगेसी की ज़ुबानी

कृति सानन और पंकज त्रिपाठी की फिल्म मिमी मातृत्व के संवेदनशील विषय को सरोगेसी यानि किराये की कोख के इर्दगिर्द रची गयी कहानी के ज़रिये हल्केफुल्के ढंग...

Decoding Craft of Christopher Nolan Movies ‘Endings’

Ever felt how Christopher Nolan's movies make us sit through the ambiguous endings?...

मालिक: समाज-सियासत का अक्स दिखाती फ़हद फ़ासिल की ‘आंखें’

आंखों से बेहतरीन अभिनय कैसे किया जाता है, फहाद लगातार उस कला में ख़ुद को फ़िल्म दर फ़िल्म मांजते हुए 'मलिक' में महारथी की तरह उभरे हैं। इरफान की...

नाम में क्या रखा है : दिलीप कुमार के बहाने

हिंदुस्तानी सिनेमा की जो धर्मनिरपेक्षता और साझा संस्कृति की परंपरा रही है, दिलीप कुमार उसी परंपरा के महान आइकन हैं क्योंकि वे जितने दिलीप कुमार हैं...

गुरुदत्त के बिना वर्ल्ड सिनेमा की बात करना बेमानी है

फ्रेंच न्यू वेव के संचालकों की तरह ही गुरुदत्त ने भी सेकेंड वर्ल्ड वॉर के प्रभाव को करीब से देखा था। अलमोड़ा का उदय शंकर इंडियन कल्चरल सेंटर 1944 में...

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