Guru Dutt

News/ Updates

गुरु दत्त: ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है….

हिन्दी सिनेमा में गुरु दत्त एक ऐसे अदाकार और डायरेक्टर हुए हैं, जिन्हें बहुत कम ज़िंदगी मिली, लेकिन अपनी इस मुख़्तसर-सी ही ज़िंदगानी में वे फ़िल्मी दुनिया को इतना कुछ दे गये कि लोग उन्हें आज भी बड़ी शिद्दत से याद करते हैं। बहुत कम डायरेक्टरों को अवाम की यह मुहब्बत और चाहत हासिल होती है। गुरु दत्त का नाम हिन्दी सिनेमा के इतिहास में सुनहरे हुरूफ़ में दर्ज है।

Alok Nandan
News/ Updates

गुरुदत्त के बिना वर्ल्ड सिनेमा की बात करना बेमानी है

फ्रेंच न्यू वेव के संचालकों की तरह ही गुरुदत्त ने भी सेकेंड वर्ल्ड वॉर के प्रभाव को करीब से देखा था। अलमोड़ा का उदय शंकर इंडियन कल्चरल सेंटर 1944 में गुरुदत्त के सामने ही सेकेंड वर्ल्ड वॉर के चलते बंद हुआ था। गुरुदत्त यहां पर 1941 से स्कॉलरशिप पर एक छात्र के रूप में रहे थे। बाद में मुंबई में बेरोजगारी के दौरान उन्होंने आत्मकथात्मक फिल्म प्यासा लिखी। इस फिल्म का वास्तविक नाम कशमकश था।

Scroll to Top