
न्यू दिल्ली फिल्म फाउंडेशन (NDFF) के Talk Cinema On The Floor (TCOTF) के सितंबर चैप्टर में सिनेमा, संगीत और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी कहानियों पर सार्थक संवाद हुआ। FTII के पूर्व विद्यार्थी एवं पटकथा लेखक शिरीष शर्मा ने पहली फिल्म के विचार से पटकथा तक के सफर पर अनुभव साझा किए, जबकि उभरते संगीतकार Bodh ने नए Music Chapter की शुरुआत की। Spotlight सत्र में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित संथाली फिल्मकार रवि राज मुर्मू ने सीमित संसाधनों में फिल्म बनाने और अपनी भाषा-संस्कृति से जुड़ी कहानियां कहने की अहमियत पर जोर दिया। 12 सितंबर 2026 को SACAC, दिल्ली में आयोजित इस चैप्टर में युवाओं और Gen Z की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
“फिल्म बनाने के लिए आदर्श परिस्थितियों का इंतज़ार मत कीजिए। ज़रूरत पड़े तो मोबाइल फोन से भी शुरुआत की जा सकती है।”
संथाली फिल्मकार रवि राज मुर्मू का यह संदेश Talk Cinema On The Floor (TCOTF) के सितंबर चैप्टर की सबसे महत्वपूर्ण सीखों में से एक बनकर सामने आया। उनकी फिल्म आंगेन को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक की श्रेणी में सम्मानित किया गया। सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी भाषा और संस्कृति में कहानी कहने की उनकी यात्रा ने युवा फिल्मकारों को याद दिलाया कि सिनेमा की शुरुआत महंगे उपकरणों से नहीं, बल्कि एक विचार और उसे पर्दे पर उतारने के संकल्प से होती है।
12 सितंबर 2026 को श्री अरविंदो सेंटर फॉर आर्ट्स एंड क्रिएटिविटी (SACAC), दिल्ली में आयोजित TCOTF का सितंबर चैप्टर सिनेमा, लेखन, संगीत और सांस्कृतिक पहचान के अलग-अलग पहलुओं को एक साझा मंच पर लेकर आया। न्यू दिल्ली फिल्म फाउंडेशन (NDFF) की इस मासिक पहल में फिल्मकारों, लेखकों, संगीतकारों, विद्यार्थियों और सिनेमा प्रेमियों ने भाग लिया। इस बार कार्यक्रम में युवा प्रतिभाओं और Gen Z की उल्लेखनीय भागीदारी भी देखने को मिली।
SACAC, मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्किल्स काउंसिल (MESC) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव स्किल्स (IICS) के सहयोग से आयोजित यह चैप्टर एक बार फिर इस विचार को सामने लाया कि सिनेमा सीखने और समझने की प्रक्रिया केवल औपचारिक कक्षाओं तक सीमित नहीं है। खुला संवाद, सवाल-जवाब और अनुभवों का साझा होना भी रचनात्मक विकास के महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
संवाद से शुरुआत, सिनेमा की समझ की ओर
कार्यक्रम की शुरुआत होस्ट निवृत्ति खत्री और पुनीत शर्मा ने की। इसके बाद NDFF के संस्थापक एवं महासचिव आशीष के. सिंह ने Talk Cinema On The Floor की सोच और उद्देश्य पर बात की। उन्होंने TCOTF को ऐसे मंच के रूप में रेखांकित किया, जहाँ लोग सिनेमा को देखने के साथ-साथ उस पर बातचीत कर सकें, सवाल पूछें, सीखें और नए रचनात्मक सहयोग की संभावनाएँ तलाशें।
TCOTF की यही खूबी इसे सामान्य फिल्म-संबंधी आयोजनों से अलग बनाती है। यहाँ मंच पर मौजूद विशेषज्ञों के अनुभवों के साथ-साथ प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं और विचारों को भी बराबर महत्व दिया जाता है।
Craft & Crew: पहली कहानी और पहली पटकथा का सफर
कार्यक्रम के पहले प्रमुख सत्र Craft & Crew में FTII, पुणे के पूर्व विद्यार्थी और लेखक-पटकथा लेखक शिरीष शर्मा ने युवा प्रतिभागियों से संवाद किया। “Your First Film: Where Does It Begin? From the First Idea to the First Draft” विषय पर केंद्रित इस सत्र में उन्होंने किसी विचार को कहानी और फिर पटकथा में बदलने की प्रक्रिया पर अपने अनुभव साझा किए।
भैयाजी सुपरहिट और माज़ी सहित 12 फीचर फिल्मों से जुड़े लेखक शिरीष शर्मा ने लेखन को केवल तकनीकी अभ्यास के बजाय व्यक्तिगत अनुभवों, संवेदनाओं और जीवन को देखने की दृष्टि से जुड़ी प्रक्रिया के रूप में समझाया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लेखक की शुरुआती कहानियाँ अक्सर उसके अपने अनुभवों और आसपास की दुनिया से जन्म लेती हैं। जीवन को गहराई से देखना, महसूस करना और समझना कहानी को अधिक विश्वसनीय तथा प्रभावशाली बनाने में मदद करता है।
सत्र में युवा फिल्मकारों के लिए यह समझने का अवसर था कि पहली फिल्म की शुरुआत किसी बहुत बड़े विचार या असाधारण संसाधन से होना जरूरी नहीं। एक विचार को विकसित करना, उसके भीतर के संघर्ष को पहचानना और उसे पटकथा का रूप देना ही फिल्म निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहला कदम है।

Music Chapter: Bodh के साथ संगीत की नई शुरुआत
इस सितंबर चैप्टर का एक खास आकर्षण TCOTF के नए Music Chapter की शुरुआत रही। इसके अंतर्गत हर महीने एक उभरते संगीतकार या कलाकार को Artist of the Month के रूप में मंच देने की पहल की गई है। इस बार यह अवसर गायक, गीतकार और म्यूजिक प्रोड्यूसर Bodh को मिला।
Bodh हाल ही में लोकप्रिय गीत Senorita के अपने हरियाणवी अंदाज वाले वीडियो के कारण सोशल मीडिया पर चर्चा में आए थे। उन्होंने अपनी संगीत यात्रा, प्रयोग करने की स्वतंत्रता और संगीत तैयार करने के अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने अपनी कुछ नई मौलिक रचनाएँ भी प्रस्तुत कीं, जिन्हें उपस्थित लोगों ने सराहा।
इस सत्र ने TCOTF के दायरे को सिनेमा से जुड़े तकनीकी और रचनात्मक संवाद से आगे बढ़ाते हुए संगीत और प्रदर्शन कलाओं तक विस्तार देने की दिशा में एक नया कदम रखा। फिल्म निर्माण में संगीत की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह पहल विभिन्न कलाओं से जुड़े लोगों के बीच संवाद और संभावित सहयोग के अवसर भी पैदा कर सकती है।

Spotlight: रवि राज मुर्मू और अपनी जड़ों की कहानियाँ
सितंबर चैप्टर के Spotlight सत्र में युवा संथाली फिल्मकार रवि राज मुर्मू ऑनलाइन जुड़े। उनकी फिल्म आंगेन को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक की श्रेणी में सम्मान मिला। उनकी बातचीत का केंद्र रहा—अपनी भाषा, संस्कृति और समुदाय की कहानियों को सिनेमा के माध्यम से सामने लाना।
रवि राज ने सीमित संसाधनों में फिल्म बनाने की चुनौतियों और अपनी रचनात्मक यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति में काम करने की अपनी चुनौतियाँ होती हैं, लेकिन अपने समुदाय के साथ जुड़ाव कहानी, सहयोग और संसाधन जुटाने की संभावनाएँ भी खोलता है।
उनका संदेश विशेष रूप से उन युवा फिल्मकारों के लिए प्रासंगिक था, जो फिल्म बनाने की इच्छा रखते हैं, लेकिन साधनों की कमी के कारण शुरुआत नहीं कर पाते। रवि राज ने उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ी कहानियों को पहचानने और उपलब्ध साधनों के साथ काम शुरू करने के लिए प्रेरित किया। उनकी यात्रा ने यह भी रेखांकित किया कि स्थानीय भाषा में कही गई कहानी अपनी सांस्कृतिक विशिष्टता बनाए रखते हुए व्यापक दर्शकों तक पहुँच सकती है।

सीखने से आगे, एक रचनात्मक समुदाय की ओर
सितंबर चैप्टर का समापन नेटवर्किंग टी और प्रतिभागियों के बीच अनौपचारिक बातचीत के साथ हुआ। आयोजन में NDFF की ओर से हरिंदर कुमार, वैभव मैत्रेय और कृश गुप्ता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी निवृत्ति खत्री और पुनीत शर्मा ने संभाली जबकि मीडिया कवरेज का संचालन मुकेश ने किया।
TCOTF की निरंतरता और बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि दिल्ली-NCR में ऐसे खुले मंचों की जरूरत है, जहाँ अलग-अलग विधाओं, अनुभवों और पीढ़ियों के रचनात्मक लोग एक-दूसरे से मिल सकें। खासकर युवा प्रतिभाओं के लिए यह मंच अपने विचार साझा करने, अनुभवी लोगों से सीखने और समान सोच वाले साथियों से जुड़ने का अवसर उपलब्ध कराता है।
Talk Cinema On The Floor का उद्देश्य केवल सिनेमा पर बात करना नहीं, बल्कि ऐसी रचनात्मक बिरादरी बनाना है जो एक-दूसरे से सीखे, एक-दूसरे को आगे बढ़ाए और मिलकर सार्थक सिनेमा की संभावनाओं को तलाशे। सितंबर चैप्टर में पटकथा लेखन, संगीत और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी कहानियों का संगम इसी दिशा में एक और कदम रहा।

