News/ Updates

News/ Updates

याद-ए-साहिर बरास्ते ‘ख़ूबसूरत मोड़’: ‘चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों’

वह कहानी जिसको पूर्णता प्रदान करना सम्भव न हो उसे ‘एक ख़ूबसूरत मोड़’ देना बेहतर होता है। ज़ाहिर है जिस रिश्ते को किसी ‘नाम’ के अंजाम तक न पहुँचाया जा सके समाज मे उसकी कोई ‘मान्यता’ नहीं होती, इसलिये उस ‘रिश्ते’ को तोड़ देना ही अच्छा होता है।

News/ Updates

‘गमन’ : इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यों है?

शहर उतना दे नहीं पा रहा जितनी उम्मीद थी। यहाँ बेहतर भविष्य केवल सपना है। हक़ीकत चंद लोगों के लिए है। वह टैक्सी में इन ‘चंद लोगों’ की दुनिया देखता है,उनकी अट्टालिकाएं देखता है, और दूसरी तरफ सड़कों में बसर कर रहे लोगों को देखता है, मगर दिल है कि मानता नहीं! लगता है कुछ हो जाएगा।

News/ Updates

सुसमन: आत्मा की चादर बीनने की दारुण दुख गाथा

श्याम बेनेगल की इस फिल्म में ‘रामुलु’ एक कुशल बुनकर है पर उस का हुनर केवल प्रतिष्ठा की बात रह गयी है, वह रोटी नहीं दे पाती। वह कपड़े बुनता है मगर अपनी बेटी के लिए साड़ी बुन सके उसके लिए धागे नहीं है।

News/ Updates

किरदार और कहानी से गढ़ी एक ‘भूमिका’

फ़िल्म ‘भूमिका’ आजादी के पूर्व और बाद के दो दशकों में एक स्त्री के व्यावसायिक सफलता मगर मानवीय चाह की असफलता के द्वंद्व को रेखांकित करती है।

News/ Updates

वोदका लेमन: बिना विकल्पों वाले जीवन के सफ़र का संगीत

विश्व के सिनेमाई सौंदर्य के गुह्य रस्म-रिवाज़ सीरीज़ की चौथी और अंतिम कड़ी के तौर पर प्रस्तुत है आर्मीनियाई फिल्मकार हिनर सलीम

News/ Updates

The Bow: मुक्त होने और मुक्त करने का सम्मोहन

‘विश्व के सिनेमाई सौंदर्य के गुह्य रस्म-रिवाज’ सीरीज़ के तीसरे भाग के तौर पर प्रख्यात दक्षिण कोरियाई फिल्म निर्देशक किम की-डुक की फिल्म ‘द बो’ की समीक्षा

Adieu Godard
News/ Updates

अलविदा गोदार: सिनेमा में नियम तोड़ने के नियम सिखाने का शुक्रिया

बहुमुखी प्रतिभा के धनी गोदार दोस्तों के साथ मिल कर फ़िल्म बनाते हुए ‘फ़्रेंच न्यू वेव’ सिनेमा की स्थापना कर रहे थे, साथ गॉसिप कॉलम भी लिख रहे थे। तभी उन्होंने अपनी प्रसिद्ध फ़िल्म ‘ब्रेथलेस’ पर काम प्रारंभ किया। उसी साल 1960 में आना करीना से शादी की।

News/ Updates

विश्व के सिनेमाई सौंदर्य के गुह्य रस्म-रिवाज़-2: ‘रेज़ द रेड लैंटर्न’

चीनी फिल्मकार  ‘झांग इमोउ’ (Zhang Yimou)  के निर्देशन में सन् 1991 में बनी फिल्म ‘Raise The Red Lantern’ एक ऐसे चीनी समाज का प्रतिनिधित्व करती है जिसमें पारिवारिक परंपराओं की घृणात्मक भावशून्यता को चार स्त्रियां अपनी-अपनी संभावनाओं में परस्पर विरोधी होकर ढोती हैं.

Scroll to Top