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Aamir Khan at Red Sea IFF 2024
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अरब डायरी 2024 (1): आमिर खान का सम्मान, रेड सी अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह का भव्य शुभारंभ

चौथे रेड सी अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में दुनिया भर से आए सिनेमा प्रेमियों से बातचीत करते हुए आमिर खान ने कहा कि वर्षों से उनकी इच्छा रहीं हैं कि तीनों खान (आमिर, शाहरुख और सलमान) किसी एक फिल्म में साथ-साथ काम करें। उन्होंने कहा कि पिछले महीने ही वे शाहरुख और सलमान से एक साथ मिले थे और वे भी चाहते हैं कि वे तीनों एक साथ काम करें। लेकिन ऐसी फिल्म के लिए जो कहानी उन्हें चाहिए वह अभी तक नहीं मिली है। 

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30वां कोलकाता अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव शुरू

तीसवें कोलकाता फिल्मोत्सव में फिल्मकार तपन सिन्हा के अलावा एक्टर मार्लन ब्रांडो, इतालवी अभिनेता मार्सेलो मास्त्रोआनी, सोवियत फिल्मकार सर्गेई पराजानोव, भारतीय फिल्मकार हरि साधन दासगुप्ता, अभिनेत्री/निर्देशका अरुंधती देवी, तमिल अभिनेता ए नागेश्वर राव, कला निर्देशक बंसीचंद्र गुप्त, गायक मोहम्मद रफ़ी, गायक तलत महमूद और मदन मोहन को भी श्रद्धांजलि दी जा रही है। इन सबका जन्म शताब्दी वर्ष चल रहा है।

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सिनेमा में साहित्य के ‘ढाई आखर’ की सार्थक वापसी

दर्शकों को खींचने के लिए अनेकोनेक हथकंड्डों को आजमाती फिल्मों की आपाधापी में ‘ढाई आखर’ एक ऐसे सिनेमा की दरकार  है, जिसकी गुंजाइश तो हमेशा रही है पर हर बार उसे अगर जिंदा रहना है तो एक ऐसे दर्शक वर्ग का सहयोग भी चाहिए।

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दुर्गा का प्रयाण

दुर्गा को आप बंगाली, या भारतीय सिनेमा का चरित्र ही नहीं कह सकते। यह विश्व सिनेमा की धरोहर है। जैसे लियोनार्दो दा विंची की मोनालिसा।

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नहीं रहीं ‘पथेर‌ पांचाली’ की दुर्गा

उमा दासगुप्ता ने दुर्गा के किरदार को ‘पथेर पांचाली’ में ऐसा जीवंत किया कि आज यह फिल्म दुनिया की एक ‘आइकोनिक मूवी’ बन गई है। ‘पथेर पांचाली’ को संसार की सौ बेहतरीन फिल्मों में शुमार किया जात है।

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उत्पलेंदु चक्रवर्ती: ‘चोख’ और ‘देबशिशु’ का फिल्मकार

उत्पलेंदु चक्रवर्ती अपनी फिल्मों के ज़रिए अक्सर हाशिये पर पड़े और उत्पीड़ितों के संघर्षों पर फोकस करते थे और उनके काम में सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता झलकती थी। 

Film Paar
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गौतम घोष की ‘पार’: जीवन के भीतर पार पाने का संघर्ष

फिल्म का शीर्षक ’पार’ है,  भाववादी दर्शनों में मनुष्य सांसारिकता से छुट्टी पाकर जीवन नैया ’पार’ करना चाहता है। यहां श्रमिक दंपत्ति इस जीवन के भीतर सुकून की तलाश के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें भवसागर पार नहीं करनी है। एक नदी पार करनी है ताकि अपना घर वापस लौट सकें, जहां भले भूख,गरीबी है मगर इस तरह अनामिकता, अजनबियत, छल –प्रपंच नहीं है। यद्यपि शोषण वहां भी है मगर वहां कम से कम रात को सोने को झोपड़ी तो है!

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पायल कपाड़िया की फिल्म ‘ए नाइट ऑफ नोइंग नथिंग’

‘ए नाइट ऑफ नोइंग नथिंग’ एक कलात्मक फिल्म है जो दर्शकों का मनोरंजन करती है। उनके विचारों को छूती है। उन्हें समृद्ध करती है। यह आनेवाले फिल्मकारों के लिए नये प्रतिमान गढ़ती है।

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प्रेम के बरक्स आज के यूरोप का अंधेरा दिखाती फिल्म ‘फालेन लीव्स’: कान फेस्टिवल 2023 (4)

फिनलैंड जैसे अमीर देश में गरीबी के आखिरी पायदान पर जी रहे अंसा और होलप्पा की इस मार्मिक प्रेम कहानी के माध्यम से अकी कौरिस्माकी ने आधुनिक यूरोपीय पूंजीवादी सभ्यता का अंधेरा दिखाया है जिस तरफ हमारा ध्यान अक्सर नहीं जाता।

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मुग़ल ए आज़म 6: अनारकली को माफ़ी बानज़रिए अकबर

एक बादशाह के अपने देश से और अपने सिद्धांतों से प्यार की कीमत एक मामूली कनीज़ को अपनी जिंदगी देकर चुकानी पड़ती है। वह जिन उसूलों की बात करता है उनमें बराबरी की बात शामिल नहीं है। यह गैरबराबरी नस्ली अहंकार और और निरंकुश सत्ता के मद से उपजी है। यह गैरबराबरी किसी धर्मनिरपेक्ष और बहुलतावादी सत्ता को भी लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रख सकती। यह बात जितनी अकबर के समय के लिए सत्य है, उससे भी कहीं ज्यादा आज के लिए सच है।

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