



'एक कलाकार के लिए कोई बाउंड्री नहीं होती। मैं पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री को बधाई देता हूं कि उन्होंने 'मौला जाट' जैसी सुपरहिट फिल्म बनाई। पिछले कई...
प्रसून चटर्जी द्वारा लिखित और निर्देशित बांग्ला फिल्म ‘दोस्तजी’ हाल ही में रिलीज़ हुई है और खूब तारीफ बटोर रही...
वह कहानी जिसको पूर्णता प्रदान करना सम्भव न हो उसे 'एक ख़ूबसूरत मोड़' देना बेहतर होता है। ज़ाहिर है जिस रिश्ते को किसी 'नाम' के अंजाम तक न पहुँचाया जा सके...
शहर उतना दे नहीं पा रहा जितनी उम्मीद थी। यहाँ बेहतर भविष्य केवल सपना है। हक़ीकत चंद लोगों के लिए है। वह टैक्सी में इन 'चंद लोगों' की दुनिया देखता...
श्याम बेनेगल की इस फिल्म में 'रामुलु' एक कुशल बुनकर है पर उस का हुनर केवल प्रतिष्ठा की बात रह गयी है, वह रोटी नहीं दे पाती। वह कपड़े बुनता है मगर अपनी...
फ़िल्म 'भूमिका' आजादी के पूर्व और बाद के दो दशकों में एक स्त्री के व्यावसायिक सफलता मगर मानवीय चाह की असफलता के द्वंद्व को रेखांकित करती है।...
विश्व के सिनेमाई सौंदर्य के गुह्य रस्म-रिवाज़ सीरीज़ की चौथी और अंतिम कड़ी के तौर पर प्रस्तुत है आर्मीनियाई फिल्मकार हिनर सलीम...
गोदार ने सिनेमा के भविष्य के बारे में कहा कि ‘दस साल बाद सारे थियेटर मेरी फिल्में दिखाएँगे और गंभीर सिनेमा का लोकप्रिय दौर लौटेगा।...
'विश्व के सिनेमाई सौंदर्य के गुह्य रस्म-रिवाज' सीरीज़ के तीसरे भाग के तौर पर प्रख्यात दक्षिण कोरियाई फिल्म निर्देशक किम की-डुक की फिल्म 'द बो' की...
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