निर्देशक राज कपूर मेरे आदर्श हैं, अभिनेता राज कपूर नही – रणबीर कपूर

'एक कलाकार के लिए कोई बाउंड्री नहीं होती। मैं पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री को बधाई देता हूं कि उन्होंने 'मौला जाट' जैसी सुपरहिट फिल्म बनाई। पिछले कई...

‘दोस्तजी’: ‘पथेर पांचाली’ की याद दिलाती एक अनूठी बांग्ला फिल्म

प्रसून चटर्जी द्वारा लिखित और निर्देशित बांग्ला फिल्म ‘दोस्तजी’ हाल ही में रिलीज़ हुई है और खूब तारीफ बटोर रही...

याद-ए-साहिर बरास्ते ‘ख़ूबसूरत मोड़’: ‘चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों’

वह कहानी जिसको पूर्णता प्रदान करना सम्भव न हो उसे 'एक ख़ूबसूरत मोड़' देना बेहतर होता है। ज़ाहिर है जिस रिश्ते को किसी 'नाम' के अंजाम तक न पहुँचाया जा सके...

‘गमन’ : इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यों है?

शहर उतना दे नहीं पा रहा जितनी उम्मीद थी। यहाँ बेहतर भविष्य केवल सपना है। हक़ीकत चंद लोगों के लिए है। वह टैक्सी में इन 'चंद लोगों' की दुनिया देखता...

सुसमन: आत्मा की चादर बीनने की दारुण दुख गाथा

श्याम बेनेगल की इस फिल्म में 'रामुलु' एक कुशल बुनकर है पर उस का हुनर केवल प्रतिष्ठा की बात रह गयी है, वह रोटी नहीं दे पाती। वह कपड़े बुनता है मगर अपनी...

किरदार और कहानी से गढ़ी एक ‘भूमिका’

फ़िल्म 'भूमिका' आजादी के पूर्व और बाद के दो दशकों में एक स्त्री के व्यावसायिक सफलता मगर मानवीय चाह की असफलता के द्वंद्व को रेखांकित करती है।...

वोदका लेमन: बिना विकल्पों वाले जीवन के सफ़र का संगीत

विश्व के सिनेमाई सौंदर्य के गुह्य रस्म-रिवाज़ सीरीज़ की चौथी और अंतिम कड़ी के तौर पर प्रस्तुत है आर्मीनियाई फिल्मकार हिनर सलीम...

लोग फिल्में बनाते हैं, गोदार ने सिनेमा बनाया

गोदार ने सिनेमा के भविष्य के बारे में कहा कि ‘दस साल बाद सारे थियेटर मेरी फिल्में दिखाएँगे और गंभीर सिनेमा का लोकप्रिय दौर लौटेगा।...

The Bow: मुक्त होने और मुक्त करने का सम्मोहन

'विश्व के सिनेमाई सौंदर्य के गुह्य रस्म-रिवाज' सीरीज़ के तीसरे भाग के तौर पर प्रख्यात दक्षिण कोरियाई फिल्म निर्देशक किम की-डुक की फिल्म 'द बो' की...

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