तकरीबन डेढ़ हजार बच्चों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाल फिल्म महोत्सव का उद्घाटन निर्देशक ध्रुव हर्ष की खूबसूरत हिंदी फिल्म 'इल्हाम' से हुआ।लंदन के 'रेनबो...
यह फिल्म इमरजेंसी की घटना को शीर्षक रूप में रख कर बनाई ज़रूर गई है लेकिन फिल्म की निर्माता-निर्देशक और केंद्रीय भूमिका निभा रही कंगना रनौत ने इसका...
मनुष्य का जीवन एकरेखीय नहीं होता। अलग-अलग जगहों में वह अलग-अलग भूमिकाओं में होता है। वह कहीं अफसर हो सकता है तो कहीं पिता, प्रेमी, पुत्र या किसी का...
इस फिल्म में मुख्य भूमिका पायल कपाड़िया की 'ऑल वी इमैजिन ऐज़ लाइट' फिल्म से मशहूर हुई कनी कुश्रुति, प्रीति पाणिग्रही (पहली फिल्म), केशव बिनय किरण आदि...
फिल्म 'द शेमलेस' कहीं से भी अलग से कोई नैतिक उपदेश देने की कोशिश नहीं करती और न ही किसी पर कोई आरोप लगाती है। परिस्थितियों और मानवीय संवेदनाओं के जरिए...
संध्या सूरी की फिल्म संतोष की न सिर्फ भाषा हिंदी है, बल्कि पूरी तरह आज के भारतीय समाज और उसके समसामयिक विमर्श पर आधारित है। और इन सबके बावजूद उसे...
मालेगांव के स्पूफ सिनेमा की चर्चा आज भी दुनिया भर में होती है। इसी फिल्म में एक किरदार थे नासिर शेख। रीमा कागती ने 'मालेगांव का सुपरमैन' डॉक्यूमेंट्री...
यह कहना अतिशयोक्तिपूर्ण नहीं होगा कि यह फिल्म एक कलात्मक मास्टरपीस है। ऐसा लगता है जैसे आप कोई महान साहित्यिक रचना पढ़ रहे हों, जहाँ दृश्य आपकी...
कनु बहल ने आगरा के तलछट के जीवन और दिनचर्या को बखूबी फिल्माया है और चमक दमक से भरी दुनिया गायब है। कहानी के एक-एक किरदार अपने आप में संपूर्ण है और...
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