पायल कपाड़िया की फिल्म ‘ए नाइट ऑफ नोइंग नथिंग’

'ए नाइट ऑफ नोइंग नथिंग' एक कलात्मक फिल्म है जो दर्शकों का मनोरंजन करती है। उनके विचारों को छूती है। उन्हें समृद्ध करती है। यह आनेवाले फिल्मकारों के...

प्रेम के बरक्स आज के यूरोप का अंधेरा दिखाती फिल्म ‘फालेन लीव्स’: कान फेस्टिवल 2023 (4)

फिनलैंड जैसे अमीर देश में गरीबी के आखिरी पायदान पर जी रहे अंसा और होलप्पा की इस मार्मिक प्रेम कहानी के माध्यम से अकी कौरिस्माकी ने आधुनिक यूरोपीय...

मुग़ल ए आज़म 6: अनारकली को माफ़ी बानज़रिए अकबर

एक बादशाह के अपने देश से और अपने सिद्धांतों से प्यार की कीमत एक मामूली कनीज़ को अपनी जिंदगी देकर चुकानी पड़ती है। वह जिन उसूलों की बात करता है उनमें...

एक इंडो-फ्रेंच लव स्टोरी का फ्रांस में ‘निर्वाण’

कान फिल्म फेस्टिवल के ठीक बाद फ्रांस में एक ऐसा अनोखा फिल्म फेस्टिवल होता है जो भारतीय संस्कृति और भारतीय सिनेमा को समर्पित है। दक्षिणी फ्रांस के...

गिरीश कर्नाड:  मिथक से यथार्थ तक का सफर

 गिरीश कर्नाड को संगीत अकादमी , साहित्य अकादमी , कन्नड़ साहित्य अकादमी के पुरस्कार के साथ ज्ञानपीठ सम्मान मिला था । वे पद्मश्री , पदमविभूषण से विभूषित...

कान 2024 (6): कान में संतोष शिवन को सिनेमैटोग्राफी का बड़ा सम्मान

संतोष शिवन ने इस अवसर पर आभार प्रकट करते हुए कहा कि सिनेमैटोग्राफी एक वैश्विक कला है इसलिए यह यूनिवर्सल है।जितनी आसानी से मैं तमिल और मलयालम सिनेमा...

कान 2024 (5): पायल कपाड़िया की ‘आल वी इमैजिन ऐज़ लाइट’ का शानदार प्रीमियर

कान फिल्म फेस्टिवल के 77 सालों के इतिहास में तीस साल बाद कोई भारतीय फिल्म मुख्य प्रतियोगिता खंड में चुनी गई है। वह फिल्म है पायल कपाड़िया की मलयालम...

कान 2024 (4): भारतीय सिनेमा के लिए दुनिया से बिज़नेस

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ फोटोग्राफिक आर्ट दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों को अपने तय मानदंडों के आधार पर मान्यता प्रदान करती है। कान, बर्लिन...

कान 2024 (3):भारत में आबादी, इस्लाम, तालीम पर सवाल उठाती ‘हमारे बारह’

ऊपर से लग सकता है कि यह फिल्म मुस्लिम समाज पर सीधे सीधे आरोप लगा रही है कि देश की आबादी बढ़ाने में केवल वहीं जिम्मेदार है। लेकिन आगे चलकर इस मुद्दे की...

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