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Filmmaking with AI
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AI के दौर में फिल्ममेकिंग: TCOTF में नई सीख, नए सवाल, नई संभावनाएं

“AI फिल्मकारों को रिप्लेस नहीं करेगा, बल्कि उन्हें रीडिफाइन करेगा।” इस अहम सार के साथ टॉक सिनेमा ऑन द फ्लोर के अप्रैल सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सिनेमा और तकनीक के बदलते रिश्ते पर बातचीत के साथ-साथ सीखने-सिखाने का भी दिलचस्प सत्र चला।

Talk Cinema on the Floor
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सिनेमा, ‘साइंटिस्ट’और संवाद: दिल्ली में ‘टॉक सिनेमा- मार्च चैप्टर’

‘टॉक सिनेमा ऑन द फ्लोर’ सिर्फ़ फ़िल्में दिखाने या उन पर चर्चा करने तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसा स्पेस बनाने के बारे में है जहां सिनेमा लोगों को साथ लाने का ज़रिया बन जाए — और जहां ये मुलाक़ात धीरे-धीरे एक क्रिएटिव कम्युनिटी में बदल जाए। एक ऐसे शहर में जो खुद को एक गंभीर सिनेमा हब के रूप में स्थापित कर रहा है, ऐसे स्पेस की अपनी अहमियत है और जिसकी आज बहुत ज़रूरत भी है।

Talk Cinema on the Floor
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TCOTF फरवरी चैप्टर: ‘मिनिप्लेक्स का दौर आने वाला है…’

सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि कला, व्यवसाय और दर्शक संवेदना का संगम है। NDFF के ‘Talk Cinema On The Floor’ के फरवरी अध्याय में इसी व्यापक दृष्टि पर गंभीर संवाद हुआ, जहाँ फिल्म व्यवसाय, ऑडियंस रिसेप्शन और बदलते थिएटर मॉडल पर गहन चर्चा की गई। यह पहल राजधानी का एक अनोखा community-driven creative hub बन चुकी है।

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ALT EFF Delhi 2025: सिनेमा के मंच पर सच की पड़ताल, सख्त सवाल

फेस्टिवल के दोनों दिन बेहद महत्वपूर्ण और नई जानकारियों से भरपूर कुछ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फ़िल्में प्रदर्शित की गईं। इनमें सामाजिक अन्याय, विस्थापन, जंगलों का विनाश, शहरी सीवेज प्रणाली और मानव–पर्यावरण संबंध जैसे मुद्दों को गहराई से दिखाया गया। दूसरे दिन एक महत्वपूर्ण पैनल डिस्कशन भी आयोजित किया गया, जिसका विषय था— ‘हमारा पर्यावरण, हमारा भविष्य: स्थानीय चुनौतियाँ और समाधान’।

Pariticipants Cinephiles
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TCOTF नवंबर चैप्टर: ‘कंटेंट सिर्फ कच्चा माल होता है…’

हर महीने होने वाले फिल्मकार, लेखक, छात्र, तकनीशियन और सिनेप्रेमियों के जीवंत समूह की रचनात्मक और दिलचस्प अड्डेबाज़ी के आयोजन टॉक सिनेमा ऑन द फ़्लोर ने 6 महीने पूरे कर लिए हैं। नवंबर चैप्टर में एक बार सिनेमा के अलग-अलग पहलुओं पर खास मेहमानों के साथ चर्चा हुई। यह पहल राजधानी का एक अनोखा community-driven creative hub बन चुकी है।

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