



के आसिफ की ‘मुग़ले आज़म’ जिस विराट महाकाव्यात्मक कैनवास को लेकर बनाई गई थी उसे प्रायः समझा ही नहीं गया। ‘मुग़ले आज़म’ को तब तक नहीं समझा जा सकता जब तक कि...
हाल ही में जारी किये गये फिल्म ‘आदिपुरुष’ के ट्रेलर में भगवान राम के मुंह से निकलने वाले एक संवाद में कहा जा रहा है, ‘आज मेरे लिए मत लड़ना, उस दिन के...
हंसल मेहता की नई वेब सीरीज़ 'स्कूप' में खुद को तीसमारखां समझने वाले तमाम पत्रकारों के लिए सबक है कि खबर देने वाले हर सूत्र का अपना एजेंडा होता है।...
फिल्म ‘अब दिल्ली दूर नहीं’ एक ऐसे ही सवर्ण बिहारी युवक अभय शुक्ला की कहानी है जिसके पिता गांव में किसानी करते हैं और मां दूसरों के घरों में काम करती...
मृणाल सेन स्व-शिक्षित तथा स्व-प्रशिक्षित फ़िल्म निर्देशक थे। अपनी फ़िल्म के डॉयलॉग लिखते, एडिटिंग में प्रयोग करते थे। उनका जीवन दर्शन था, ‘पृथ्वी टूट...
“नाजी यातना शिविरों की त्रासद गाथा”, मानव इतिहास के इन सबसे काले पलों को फिल्मों के माध्यम से याद करती है। दो सौ छप्पन पृष्ठों की ये किताब बीस फिल्मों...
हाल में दो महत्वपूर्ण फिल्में रिलीज़ हुई हैं। एक है सुदीप्तो सेन की ‘द केरल स्टोरी’ और दूसरी है सुधीर...
‘द केरल स्टोरी’ जैसी फिल्म मनोवैज्ञानिक रूप से दर्शकों पर यह दबाव बनाती है कि वह अपना स्टैंड तय कर लें, कि वे किस तरफ खड़े हैं और इसी में फिल्म की...
प्रसिद्ध मराठी लेखक-फिल्मकार अरुण खोपकर की साहित्य अकादमी से सम्मानित मराठी पुस्तक 'चलत चित्रव्यूह' के हिंदी अनुवाद की समीक्षा। ये पुस्तक फिल्म और कला...
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