Balraj Sahni

News/ Updates

ख़्वाजा अहमद अब्बास: जिन्होंने समाजवाद को सिनेमा के पर्दे पर पहुंचाया

देश में समानांतर या नव-यथार्थवादी सिनेमा की जब भी बात होगी, ख्वाजा अहमद अब्बास का नाम फ़िल्मों की इस मुख़्तलिफ़ धारा के रहनुमाओं में गिना जाएगा। उन्होंने अपने लेखन से पूरी दुनिया को मुहब्बत, अमन और इंसानियत का पैग़ाम दिया। अब्बास ने न सिर्फ़ फ़िल्मों, बल्कि पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में भी नए मुक़ाम क़ायम किए।

News/ Updates

भारतीय सिनेमा के जन कलाकार: बलराज साहनी

पुस्तक ‘बलराज साहनी : एक समर्पित और सृजनात्मक जीवन’ में उनके जीवन के कई अनछुए पहलुओं को बेहद गहराई से सामने लाया गया है। चाहे उनका शुरुआती जीवन हो या फिर सामाजिक, राजनीतिक आंदोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी। उनके भीतर एक कलाकार के साथ—साथ एक विचारक, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता भी बसता था।

News/ Updates

सभी भूमिकाओं में श्रेष्ठ थे  बलराज- परीक्षित साहनी

डैड ने 1938 में एक साल के लिए महात्मा गाँधी के साथ सेवाग्राम में काम किया था। अगले साल उन्हें अन्य देशों में युद्धरत भारतीय सैनिकों के लिए हिंदी में कार्यक्रम प्रसारित करने के लिए भारत-भूमि को छोड़कर इंग्लैण्ड की उड़ान भरने के लिए कहा गया। डैड पल-भर के लिए भी नहीं झिझके। वह परिवार के किसी भी सदस्य से अलग थे। वे हमेशा नई-नई ख़तरनाक चुनौतियों की तलाश में रहते थे।

News/ Updates

सच्चे ‘जन कलाकार’ थे बलराज साहनी

बलराज साहनी ने केवल अभिनेता ही नहीं बल्कि एक अध्यापक, नाट्य लेखक-निर्देशक, रेडियो उद्घोषक, ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों को पूरी ईमानदारी के साथ किया। उनके भीतरी और बाहरी रूप में कोई अलगाव न था। देश और देश की जनता के लिए कुछ बेहतर और अच्छा करने की बेचैनी ने उन्हें लाहौर, शांतिनिकेशन, सेवाग्राम(वर्धा), लंदन, बंबई और न जाने कहाँ-कहाँ घुमाया, लेकिन इन सभी जगहों से एक कलाकार के रूप में उन्होंने बहुत कुछ पाया।

Remembering Chetan Anand
News/ Updates

‘हक़ीक़त’ जैसे माहौल में चेतन आनंद की याद…

चेतन आनंद एक बेहतरीन फ़िल्मकार होने के साथ साथ बेहद ज़हीन और नफ़ीस इनसान थे। 1946 में उनकी बनाई पहली ही फ़िल्म ‘नीचा नगर’ को फ्रांस के पहले कान फ़िल्म फेस्टिवल में ‘पाम डी ओर’ सम्मान से नवाज़ा गया था।

Scroll to Top