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पंचायत सीज़न 2: ‘फुलेरा’ में दिल लगने की दिलचस्प दास्तान

जब आप कहानी के पात्रों के अभिनय को अभिनय समझना बंद कर दें, काल्पनिक गांव की गलियों से वाकिफ़ हो जाएं, जब पात्रों द्वारा कहे गए संवाद आपके हृदय में भी वही समान भाव उत्पन्न कर दें, तब समझ लीजिए कि निर्देशक ने अपना काम पूरी निष्ठा और कुशलता से किया है।

पंचलाइट की रोशनी में ‘पंचायत’

TVF आमतौर पर अपने कंटेंट में किसी सामाजिक मुद्दे पर तीखा व्यंग्य करता है, ‘पंचायत’ में ये अलग अंदाज़ में, अलग विषयवस्तु के साथ है। राजनीति में महिलाओं की भूमिका को सुनिश्चित करने के...