मीना कुमारी और ‘पाकीज़ा’ की कुछ अनकही
‘पाकीज़ा’ मीना कुमारी और कमाल अमरोही द्वारा देखा गया ऐसा सृजनात्मक सामूहिक सपना था जिसे पूरा करने में अनेकों रुकावटें आईं लेकिन मीना कुमारी ने इसे पूरा करके ही अपनी देह छोड़ी।
‘पाकीज़ा’ मीना कुमारी और कमाल अमरोही द्वारा देखा गया ऐसा सृजनात्मक सामूहिक सपना था जिसे पूरा करने में अनेकों रुकावटें आईं लेकिन मीना कुमारी ने इसे पूरा करके ही अपनी देह छोड़ी।
पुरस्कार देने से पहले सत्यजित राय से पूछा गया था आप किनके हाथों यह ऑस्कर ट्राफी लेना चाहेंगे? सत्यजित राय ने तत्काल अभिनेत्री ऑड्रे हेपबर्न का नाम लिया था। सत्यजित राय अभिनेत्री ऑड्रे हेपबर्न के बहुत बड़े फैन थे।
आनंद बक्शी की तमन्ना थी कि वो आख़िरी दिन तक गाने लिखते रहें। ज़िंदगी के आख़िरी दो महीनों में उन्होंने नौ गाने लिखे। ये गाने अनिल शर्मा और सुभाष घई के लिए थे। बक्शी जी भूतपूर्व फ़ौजी थे और हमेशा इज़्ज़त से विदा होना चाहते थे। वो क़तई नहीं चाहते थे कि रिटायर हो जाएँ और बीमारी की वजह से काम बंद कर दें। वो कहते थे-
‘इससे पहले कि फ़िल्म इंडस्ट्री मुझे छोड़े, मैं फ़िल्म इंडस्ट्री को छोड़ना चाहता हूँ।‘
डारडेन बंधुओं ‘ल इनफैंट’ (द चाइल्ड) को बेस्ट फिल्म का ‘पाम डि ओर’ पुरस्कार मिला तो दुनिया का ध्यान यहां की फिल्मों की ओर गया। इस फिल्म ने बेल्जियम के सिनेमा का एक नया व्याकरण रचा और इटैलियन न्यू वेव सिनेमाई दौर की वित्तोरियो डि सिका की विश्व प्रसिद्ध फिल्म ‘बायसिकिल थीव्स’ (1948) के 57 वर्ष बाद बच्चे एक बार फिर से सिनेमा के केंद्र में आए और उन्हें एक नया नायकत्व मिला। यह सिलसिला आज भी जारी है और बाल मनोविज्ञान बेल्जियम के सिनेमा की नई पहचान बन चुका है।
यदि निर्देशक अनुभव सिन्हा मानते हैं कि फिल्म ‘भीड़’ को ब्लैक एंड वाइट में बनाकर उन्होंने एक युग का प्रतिनिधित्व किया है तो वह सरासर गलत है…
जब अंधेरा ज्यादा होता है तभी चिराग जलाने की ख्वाहिश होती है। थोड़ी रोशनी बढ़े। दुनिया के तमाम धर्म ग्रंथ जोड़ने का काम करता है, सामवेद भी जोड़ता है।
एशिया और भारत के लिए इस बार के ऑस्कर में कुछ और भी खास बातें रहीं। जैसे कि बेस्ट एक्स्ट्रेस की कैटेगरी में पहली बार किसी एशियन अभिनेत्री (मिशेल यो, मलेशिया, EEAAO के लिए) ने ऑस्कर जीता। वहीं ‘नाटू नाटू’ को मिला बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग का अवॉर्ड भी पहली बार किसी भारतीय प्रोडक्शन के लिए मिला इस कैटेगरी का अवॉर्ड है। बेस्ट डॉक्यूमेंट्री के तौर पर भी पहली बार किसी भारतीय डॉक्यूमेंट्री फिल्म को ये अवॉर्ड मिला है।
‘दोस्तजी’ 17 मार्च, 2023 को अमेरिका के 26 राज्यों के 75 शहर, कनाडा के 17 शहर, आस्ट्रेलिया के 10 शहर के अलावा न्यूजीलैंड और संयुक्त अरब अमीरात के दुबई, अबू धाबी, शारजाह और करीब साढ़े पांच लाख की आबादी वाले अजमन सिटी में भी एक साथ रिलीज होने जा रही है।
फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में सतीश कौशिक द्वारा निभाए गए “कैलेंडर” के किरदार के लोग आज भी मुरीद हैं। एक रसोइया के किरदार को उन्होंने सिल्वर स्क्रीन पर इस तरह से पेश किया था कि वह बच्चों के बीच उनके सबसे चहेते अदाकार के रूप में स्थापित हो गया था।
आयरिश मूल के कियॉन का बचपन 7 सालों तक 13 अलग अलग अनाथालय में बीता। एक्टिंग का पहला मौका उन्हे तब मिला जब एक दुकान में लगा ऐड देखकर उन्होने अप्लाई किया। जिसमें उन्हे कुछ नहीं दिया गया, ना ही कुछ हासिल होना था…लेकिन आज 30 साल की उम्र में वो ऑस्कर की रेस में हैं।