मृणाल सेन की ‘एक दिन अचानक’ में छिपा हर दौर का विमर्श
फिल्म ’एक दिन अचानक’ के रिटायर्ड प्रोफेसर शशांक राय के जीवन त्रासदी लगभग ऐसी ही है। भरा–पूरा मध्यमवर्गीय परिवार है।पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है।जीवन भर ईमानदारी से अध्यापन किया, साहित्य में काम किया, मगर वह ‘सम्मान’ नहीं मिला जिसके कुछ हद तक वे आकांक्षी थे। शशांक राय की पीड़ा मुख्यतः वही है जो वे अपनी बेटी नीता से एक बार कहते हैं “तुम जानती हो नीता हमारे यहां सबसे कीमती चीज है सफलता, कामयाबी! साधना डेडिकेशन की कोई कीमत नही है इस दुनिया में।”










