News/ Updates

News/ Updates

अरुण खोपकर की ‘चलत् चित्रव्यूह’ अब हिंदी में

प्रसिद्ध मराठी लेखक-फिल्मकार अरुण खोपकर की साहित्य अकादमी से सम्मानित मराठी पुस्तक ‘चलत चित्रव्यूह’ के हिंदी अनुवाद की समीक्षा। ये पुस्तक फिल्म और कला जगत की महान हस्तियों से जुड़े उनके संस्मरणों का संग्रह है।

News/ Updates

‘एकमात्र सत्यजित राय…’ – ऋत्विक कुमार घटक

जो भी हो, सत्यजित बाबू के शिल्पकर्म को लेकर यह आलोचना नहीं है। उनकी ‘पथेर पांचाली’ हम लोगों को या मेरी ज्ञान-पिपासा को कैसे संतुष्ट करती है, इसका लाक्षणिक बखान भर है यह ! सत्यजित राय पर ऋत्विक घटक के दुर्लभ आलेख का जयनारायण प्रसाद का किया हिंदी अनुवाद।

News/ Updates

मनोज बाजपेयी: कुछ पाने की ज़िद

मनोज को न केवल हर मोड़ पर उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा था बल्कि अपनी लंबाई, वजन, सेक्स अपील की कमी और व्यक्तित्व में करिश्मा न होने जैसे ताने भी सुनने पड़ रहे थे। मनोज कहते हैं, ‘मेरे थिएटर के अनुभव की यहाँ कोई कीमत ही नहीं थी। मैं हैरान था कि निर्माता-निर्देशकों को एक अनुभवी अभिनेता और एक नए-नवेले अभिनेता में फर्क की कोई ज़रुरत नहीं थी।’

News/ Updates

सच्चे ‘जन कलाकार’ थे बलराज साहनी

बलराज साहनी ने केवल अभिनेता ही नहीं बल्कि एक अध्यापक, नाट्य लेखक-निर्देशक, रेडियो उद्घोषक, ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों को पूरी ईमानदारी के साथ किया। उनके भीतरी और बाहरी रूप में कोई अलगाव न था। देश और देश की जनता के लिए कुछ बेहतर और अच्छा करने की बेचैनी ने उन्हें लाहौर, शांतिनिकेशन, सेवाग्राम(वर्धा), लंदन, बंबई और न जाने कहाँ-कहाँ घुमाया, लेकिन इन सभी जगहों से एक कलाकार के रूप में उन्होंने बहुत कुछ पाया।

News/ Updates

ओटीटी कंटेंट में गंदगी पर बॉलीवुड भी बोलने लगा

खुलकर के गाली-गलौज और अश्लील संवादों का इस्तेमाल सबसे पहले फिल्मों में फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने न सिर्फ शुरू किया था, बल्कि ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ और ‘रियलिस्टिक क्रिएटिव टच’ के नाम पर इसको लगातार जस्टिफाई भी करते रहे।

News/ Updates

‘द एलिफेंट व्हिस्परर्स’ को इसलिए मिला ऑस्कर

बेली बताती है कि मेरी बेटी के मर जाने के बाद रघु का आना ऐसा लगा कि बेटी ही वापस आ गई, रघु ने अपनी सूंड से मेरे आँसू पोंछे.. वह छोटे बच्चों की तरह मेरे कपड़े खींचता था, मुझे उसका प्यार महसूस हुआ और रघु ने भी मुझमें मां की-सी सुगंध को अनुभव किया होगा…

News/ Updates

फिल्म लेखक व्रजेंद्र गौड़ की याद में

हिंदी फिल्मों का वो लेखक जिसके लिखे संवादों में हीरो विनोद खन्ना और हीरोइन सायरा बानो टैगोर और निराला की कविता को लेकर चर्चा करते हुए दिखे थे।

News/ Updates

मीना कुमारी और ‘पाकीज़ा’ की कुछ अनकही 

‘पाकीज़ा’ मीना कुमारी और कमाल अमरोही  द्वारा देखा गया ऐसा  सृजनात्मक सामूहिक सपना था जिसे पूरा करने में अनेकों रुकावटें आईं लेकिन मीना कुमारी ने इसे पूरा करके ही अपनी देह छोड़ी।

News/ Updates

भारतीय सिनेमा के लिए ‘ऑस्कर’ का सबसे यादगार दिन

पुरस्कार देने से पहले सत्यजित राय से पूछा गया था आप किनके हाथों यह ऑस्कर ट्राफी लेना चाहेंगे? सत्यजित राय ने तत्काल अभिनेत्री ऑड्रे हेपबर्न का नाम लिया था। सत्यजित राय अभिनेत्री ऑड्रे हेपबर्न के बहुत बड़े फैन थे।

News/ Updates

दुनिया में ऐसा कहां सबका नसीब है… : आनंद बक्शी की याद 

आनंद बक्शी की तमन्ना थी कि वो आख़िरी दिन तक गाने लिखते रहें। ज़िंदगी के आख़िरी दो महीनों में उन्होंने नौ गाने लिखे। ये गाने अनिल शर्मा और सुभाष घई के लिए थे। बक्शी जी भूतपूर्व फ़ौजी थे और हमेशा इज़्ज़त से विदा होना चाहते थे। वो क़तई नहीं चाहते थे कि रिटायर हो जाएँ और बीमारी की वजह से काम बंद कर दें। वो कहते थे-
‘इससे पहले कि फ़िल्म इंडस्ट्री मुझे छोड़े, मैं फ़िल्म इंडस्ट्री को छोड़ना चाहता हूँ।‘

Scroll to Top