Ritwik Ghatak

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मृणाल सेन: हमें इतिहास को बार-बार नए सिरे से पढ़ना होगा

अपनी फ़िल्मों के बारे में ख़ुद मृणाल सेन का कहना था, ‘‘ग़रीबी, सूखा, अकाल और सामाजिक अन्याय मेरे समय का यथार्थ है, एक फ़िल्म निर्देशक की हैसियत से मेरी फ़िल्में इन्हें समझने और उनके कारण जानने का माध्यम हैं।’’ मृणाल सेन देश में ‘न्यू वेव सिनेमा’ आंदोलन या समानांतर सिनेमा के भी जनक माने जाते हैं। उनकी फ़िल्मों में सामाजिक यथार्थ तो है ही, ग़ौर से अगर इन्हें देखें, तो यह प्रतिबद्ध राजनीतिक फ़िल्में भी हैं।

Ritwik Ghatak centenary
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ऋत्विक घटक जन्मशती: विस्थापन भोगे ‘नागरिक’ की याद

इस आयोजन में घटक की फिल्म ‘नागरिक’ की स्क्रीनिंग और उस पर महत्वपूर्ण सिनेमा विशेषज्ञों की चर्चा बहुत खास रही। विभाजन पर बनायी ऋत्विक घटक की पहली फिल्म ‘नागरिक’ की कहानी विभाजन के तुरंत बाद के कलकत्ता की है। फिल्म उत्तरी बंगाल के एक परिवार के ज़रिए युद्ध और विभाजन के बाद के दौर के संघर्षों के बारे में बात करती है।

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ऋत्विक घटक: भारतीय सिनेमा का एक ‘अनकट डायमंड’

निमाई घोष निर्देशित बांग्ला फिल्म ‘छिन्नमूल’ (अपरुटेड, 1950) में ऋत्विक घटक ने पहली दफा अभिनय किया। यह पहली भारतीय मूवी है, जो विभाजन (1947) की कहानी कहती है। इस फिल्म में दिखलाया गया है कि किसानों के एक समूह को ईस्ट पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से किस तरह कलकत्ता आने को मजबूर किया गया।

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‘एकमात्र सत्यजित राय…’ – ऋत्विक कुमार घटक

जो भी हो, सत्यजित बाबू के शिल्पकर्म को लेकर यह आलोचना नहीं है। उनकी ‘पथेर पांचाली’ हम लोगों को या मेरी ज्ञान-पिपासा को कैसे संतुष्ट करती है, इसका लाक्षणिक बखान भर है यह ! सत्यजित राय पर ऋत्विक घटक के दुर्लभ आलेख का जयनारायण प्रसाद का किया हिंदी अनुवाद।

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