The heart of the session was the Craft & Crew segment led by Rucheka Chaudhry—and it quickly moved beyond buzzwords into practical understanding.
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“AI फिल्मकारों को रिप्लेस नहीं करेगा, बल्कि उन्हें रीडिफाइन करेगा।” इस अहम सार के साथ टॉक सिनेमा ऑन द फ्लोर के अप्रैल सत्र आयोजित किया गया, जिसमें...
सत्यजित राय मानवीय संवेदनाओं के चितेरे थे। जिन्होंने सेल्युलाइड पर अपनी फ़िल्मों से कई बार करिश्मा किया। उन्होंने हमेशा कलात्मक और यथार्थवादी शैली की...
पुस्तक 'बलराज साहनी : एक समर्पित और सृजनात्मक जीवन' में उनके जीवन के कई अनछुए पहलुओं को बेहद गहराई से सामने लाया गया है। चाहे उनका शुरुआती जीवन हो या...
किताब में एक जगह इरफ़ान के हवाले से दर्ज है, ''मौत के बहुत सारे चेहरे हैं, अनूप साब। वे मेरा मन बहलाते रहते हैं, और मैं बेहतर ढंग से सांस लेने लगता...
‘सत्यजित राय मेमोरियल टॉक’ केवल एक स्मृति आयोजन नहीं, बल्कि सिनेमा की उस विरासत को जीवित रखने का प्रयास है, जो हमें बेहतर देखने, समझने और महसूस करने...
1990 में ज़ोहरा सहगल भारत लौट आईं और अपनी ज़िंदगी के आख़िर तक यहीं रहीं। उन्होंने कई हिन्दी फ़िल्मों, नाटकों और टीवी सीरियल में अभिनय किया। 'मुल्ला...
‘मटका किंग’ का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका सामाजिक संदर्भ है। यह सीरीज़ उस दौर को दिखाती है— जब स्वतंत्रता के बाद का भारत आर्थिक अस्थिरता से गुजर रहा था...
Talk Cinema on the Floor is not just about screening films or hosting discussions.
It is about creating a space where cinema becomes a reason for...
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