किताब में एक जगह इरफ़ान के हवाले से दर्ज है, ''मौत के बहुत सारे चेहरे हैं, अनूप साब। वे मेरा मन बहलाते रहते हैं, और मैं बेहतर ढंग से सांस लेने लगता...
‘सत्यजित राय मेमोरियल टॉक’ केवल एक स्मृति आयोजन नहीं, बल्कि सिनेमा की उस विरासत को जीवित रखने का प्रयास है, जो हमें बेहतर देखने, समझने और महसूस करने...
1990 में ज़ोहरा सहगल भारत लौट आईं और अपनी ज़िंदगी के आख़िर तक यहीं रहीं। उन्होंने कई हिन्दी फ़िल्मों, नाटकों और टीवी सीरियल में अभिनय किया। 'मुल्ला...
‘मटका किंग’ का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका सामाजिक संदर्भ है। यह सीरीज़ उस दौर को दिखाती है— जब स्वतंत्रता के बाद का भारत आर्थिक अस्थिरता से गुजर रहा था...
Talk Cinema on the Floor is not just about screening films or hosting discussions.
It is about creating a space where cinema becomes a reason for...
'टॉक सिनेमा ऑन द फ्लोर' सिर्फ़ फ़िल्में दिखाने या उन पर चर्चा करने तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसा स्पेस बनाने के बारे में है जहां सिनेमा लोगों को साथ...
गर्म हवा की कहानी घूमती है सलीम मिर्जा' (बलराज साहनी), जो कि आगरा में एक जूते के कारखाने के मालिक हैं, उनके इर्द गिर्द। बँटवारा हो चुका है, सलीम...
देशभर में बड़ी संख्या में ऐसे तथाकथित फिल्म फेस्टिवल सामने आ रहे हैं, जिनका मकसद सिनेमा, संवाद, बाज़ार या प्रतिभा को मंच देना नहीं, बल्कि नये...
न्यू थिएटर्स का दौर भारतीय सिनेमा की यात्रा में हमेशा एक मील का पत्थर रहेगा। न्यू थिएटर्स के योगदान को जिन अहम पहलुओं के ज़रिए समझा जा सकता है, उनमें...
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