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अरब डायरी 3: सिनेमा में सफलता के लिए किसी ‘एक्स फैक्टर’ की उम्मीद नहीं कर सकते- कटरीना कैफ़

कटरीना ने कहा कि सऊदी अरब में नया-नया सिनेमा आया है। यहां के कलाकारों और फिल्मकारों से कहना चाहती हूं कि वे अपने उद्देश्य में स्पष्ट रहें। अपने ऊपर किसी को संदेह न करने दें। यहां के लोग जब अपनी कहानियों के साथ सिनेमा में आएंगे तो सारी दुनिया उन्हें देखेगी।

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अरब डायरी 2: ‘एनीमल’ से भी हिंसक होगी करण जौहर की ‘किल’?

करण जौहर ने अपनी नई फिल्म ‘किल’ के बारे में कहा कि यह हिंदी सिनेमा के इतिहास में संभवतः सबसे हिंसक फिल्म है जिसे एक साथ देखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा हूं। इसे खाली पेट मत देखिएगा नहीं तो फिल्म देखने के बाद खाना नहीं खा पाएंगे। इसी साल टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में इस फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर हुआ था और कहा जाता है कि वहां इसे बहुत पसंद किया गया।

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अरब डायरी 1: अमिताभ, शाहरुख मेरे आदर्श थे- रणवीर सिंह

सऊदी अरब के जेद्दा शहर में आयोजित तीसरे रेड सी अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह की शुरुआत रणवीर सिंह के संवाद से हुई। उद्घाटन समारोह में हालीवुड की मशहूर अभिनेत्री शैरोन स्टोन और फेस्टिवल प्रमुख मोहम्मद अल तुर्की ने रणवीर सिंह को सम्मानित किया।

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ऋत्विक घटक: भारतीय सिनेमा का एक ‘अनकट डायमंड’

निमाई घोष निर्देशित बांग्ला फिल्म ‘छिन्नमूल’ (अपरुटेड, 1950) में ऋत्विक घटक ने पहली दफा अभिनय किया। यह पहली भारतीय मूवी है, जो विभाजन (1947) की कहानी कहती है। इस फिल्म में दिखलाया गया है कि किसानों के एक समूह को ईस्ट पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से किस तरह कलकत्ता आने को मजबूर किया गया।

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‘किलर्स आफ द फ्लावर मून’- अमेरिका के रक्तरंजित अतीत की अनजान कहानी

मार्टिन स्कॉर्सेसी ने पूरी ईमानदारी से इतिहास की विलक्षण कहानी कही है। उन्होंने अमेरिकी सत्ता के पीछे के हिंसा, शोषण और लूट के छुपे हुए इतिहास को आज के संदर्भ में देखने की कोशिश की है।  स्कॉर्सेसी ने चरित्र चित्रण में कमाल की सावधानी बरती है और एक-एक चरित्र वास्तविक लगते हैं।

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फिल्म समीक्षा: भेदभाव की ‘गुठली’, अधिकार का ‘लड्डू’

दलितों, अनुसूचित जातियों के लोगों को केंद्र में रख भेदभाव की कहानियां कई बार कही गई हैं। दक्षिण भारतीय सिनेमा की ऐसी कहानियां खास करके पूरी दुनिया में चर्चित रहीं। बॉलीवुड में भी ऐसी कई कहानियां आती रही हैं जिन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है, लेकिन मौजूदा दौर में इसे लेकर सजगता, सक्रियता और रचनात्मकता बढ़ गई है।

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‘मदर इंडिया’ का महान फिल्मकार महबूब ख़ान

अपने तीस साल के फिल्मी करियर में महबूब खान ने  हॉलीवुड की तरह ही भव्य और तकनीकी  स्तर पर  श्रेष्ठ फिल्में बनाने की  कोशिश की। ‘आन देश’ की पहली  टेक्नीकलर फिल्म थी। ‘मदर इंडिया’ को  उनकी ऑल टाइम ग्रेट फिल्म कहा जाता  है और इसे क्लासिक फिल्म का दर्जा प्राप्त है।

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उत्तम कुमार: एक सितारा जो आज तक चमकता है

उत्तम कुमार बंगाल के लोगों के चहेते थे, जिन्होंने उन्हें महानायक का खिताब दिया था। बंगाल में कोई और अभिनेता नहीं हुआ, जिसने तीन दशक में उत्तम कुमार जितना कद हासिल किया हो। उन्होंने 200 से अधिक फिल्मों में काम किया था।

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